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कपिलवस्तु विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत समारोह को सकुशल सम्पन्न कराने हेतु कपिलवस्तु विश्वविद्यालय का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था में लगें अधिकारि

 
 दिनांक 13-12-2017 को पुलिस उप-महानिरीक्षक बस्ती परिक्षेत्र बस्ती श्री राकेश चन्द्र साहू द्वारा कपिलवस्तु विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत समारोह को सकुशल सम्पन्न कराने हेतु कपिलवस्तु विश्वविद्यालय का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था में लगें अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ मीटिंग किया गया । हैलिपैड और कार्यक्रम स्थल पर लगने वाले पुलिस बल और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं का विधिवत निरीक्षण किया गया । उक्त कार्यक्रम स्थल पर जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर श्री कुणाल सिल्कू, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर डा0 धर्मवीर सिंह, कुलपति श्री रंजनीकांत पाण्डेय, अपर पुलिस अधीक्षक श्री अरविन्द मिश्र व जनपद के समस्त अधीकारी/कर्मचारी मैजुद रहे।

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गाँव का जीवन और रहन सहन

भारत गाँवों का देश है । हमारे देश की साठ-सत्तर प्रतिशत जनसंख्या अब भी गाँवों में ही रहती है । गाँव का जीवन शहरी जीवन से अलग होता है । यहाँ की आबोहवा में जीना सचमुच आनंददायी होता है । गाँवों में भारतीय संस्कृति के दर्शन होते हैं । यहाँ भारत की सदियों से चली आ रही परंपराएँ आज भी विद्‌यमान हैं । यहाँ के लोगों में अपनापन और सामाजिक घनिष्ठता पाई जाती है । यहाँ खुली धूप और हवा का आनंद उठाया जा सकता है । यहाँ हरियाली और शांति होती है । हमारे गाँव भारत की कृषि व्यवस्था के आधार हैं । यहाँ कृषकों का निवास होता है । गाँव के चारों ओर खेत फैले होते हैं । खेतों में अनाज एवं सब्जियों उगाई जाती हैं । गाँवों में तालाब और नहरें होती हैं । इनमें संग्रहित जल से किसान फसलों की सिंचाई करते है । गाँवों में खलिहान होते हैं । यहाँ पकी फसलों को तैयार किया जाता है । गाँवों में खेती क अलावा पशुपालन, मुर्गीपालन, मधुमक्खी पालन जैसे व्यवसाय किए जाते हैं । पशुपालन से किसानों को अतिरिक्त आमदनी होती है तथा कृषि कार्य में सहायता मिलती है । पशुओं का गोबर खाद का काम करता है । पशु दूध देते हैं तथा बैल, भैंसा आ...

सिद्धार्थनगर का परिचय

जिले का इतिहास भगवान गौतम बुद्ध से जुड़ा है | इनके पिता शुद्धोधन की राजधानी कपिलवस्तु इसी जिले में है | इस जनपद का नामकरण गौतुम बुद्ध के बाल्यावस्था नाम राजकुमार सिद्धार्थ के नाम पर हुआ है | अतीतकाल में वनों से आच्छादित हिमालय की तलहटी का यह क्षेत्र साकेत अथवा कौशल राज्य का हिस्सा था | ईसा पूर्व छठी शताब्दी में शाक्यों ने अपनी राजधानी कपिलवस्तु में बनायीं और यहाँ एक शक्तिशाली गणराज्य कि स्थापना की | काल के थपेड़े से यह क्षेत्र फिर उजाड़ हो गया | अंग्रेजी शासन में ज़मींदारो ने यहाँ पर पैर जमाया | सन 1865 में गोरखपुर से पृथक बस्ती जिले के सृजन के बाद यह क्षेत्र बस्ती जिले में आ गया | 29 दिसम्बर 1988 को राजकुमार सिद्धार्थ के नाम पर जनपद बस्ती के उत्तरी भाग को पृथक कर सिद्धार्थनगर जिले का सृजन किया गया | उत्तर प्रदेश सरकार, राजस्व अनुभाग-5 के अधिसूचना संख्या-5-4-(4)/76-135-रा0-5(ब) दिनांक 23 दिसम्बर 1988 के आधार पर दिनांक 29 दिसम्बर 1988 से जनपद-सिद्धार्थनगर नामक नये जिले का सृजन किया गया | यह जिला पूर्व में बस्ती जिले का हिस्सा था | तहसील-बांसी, नौगढ़ और डुमरियागंज तहसीलो...